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Correct Deepawali Pujan Vidhi with mantra ,मंत्र सहित दीपावली पूजन की सही विधि

Deepawali pujan vidhi
प्रस्तुत है सभी पाठकों के लिए दीपावली ( deepawali ) पर सम्पूर्ण और सबसे अचूक और सरल माँ लक्ष्मी की पूजन विधि ( pujan vidhi ). दीपावली (deepawali)  के शुभ उपलक्ष्य पर  माँ लक्ष्मी , प्रभु गणेश और माँ सरस्वती की पूजा की जाती है.

आइये जानते हैं दीपावली पूजन विधि ( दीपावली पूजन विधि ) मन्त्रोचार सहित.

सर्वप्रथम हम पूजन सामग्री के बारे में जान लेते हैं, जिनकी हमें पूजा के समय आवस्यकता होगी.


सामग्री सूची

पुष्प:-

माँ लक्ष्मी की पूजा हेतु दीपावली पूजन में कमल या गुलाब के पुष्पों का प्रयोग ही सर्वोत्तम रहता है. अतः दीपावली पूजन में इन्ही दोनों में से किसी पुष्प का ही प्रयोग करें.


वस्त्र :-

दीपावली पूजन में माँ लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए लाल गुलाबी या पीले रंगों के रेशमी वस्त्रों का प्रयोग करें.


फल :-

दीपावली पूजन में फलों में आप नारियल, सीताफल, अनार या सिंघाड़े प्रयोग में ला सकते हैं.


अन्य आवश्यक सामग्री :-

दीपावली पूजन में जिन तीन मुख्या देवी देवताओं की पूजा की जाती है, उनकी मूर्ति या उनके चित्रों का भी प्रयोग किया जा सकता है. इसके अलावा भी अन्य सामग्रियों की सूची हम आपको बताने जा रहे है, जिनकी आपको पूजा के समय जरुरत होगी. माँ लक्ष्मी के भोग हेतु आपको घर में बनी हुयी शुद्ध घी और केशर की मिठाई बनानी चाहिए. दीप प्रज्वलित करने के लिए आपको गाय के घी की आवश्यकता होगी. इसके अलावा आपको कमल गट्टा की माला, बेलपत्र, साबूत हल्दी, पूजा की चौकी, शुद्ध पंचामृत, आभूषण, पूजा का आसन, देशी गाय का गोबर, सिन्दूर और भोजपत्र की भी आवश्यकता होगी.


अब दीपावली पूजन इस प्रकार से करें:-

सर्वप्रथम पूजा की चौकी को तैयार करें. उस पे वस्त्र बिछाएं और उस पर लक्ष्मी,सरस्वती और गणेश की सुन्दर सी प्रतिमा या चित्र स्थापित करें. उसके पश्चात अपने दाहिने हाथ में जल लेते हुए शुद्धिकरण मंत्र का जाप करते हुए स्वयं को, पूजा के आसन को और पूजा की चौकी को पवित्र कर लें. मंत्र इस प्रकार है.

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Shuddhikaran Mantra
इसके पश्चात भूमि को स्पर्श करते हुए और नमन करते हुए इस मंत्र को पढ़ते हुए आप अपना आसन ग्रहण करें.
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Deepavali poojan Mantra 2

आचमन :-

अब गंगाजल से आप निम्न मंत्र को पढ़ते हुए तीन बार आचमन करें.
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Deepavali Poojan Mantra 3

पूजन :-

अब शांत चित्त होकर मन में माँ को नमन करें, फिर उसके बाद अक्षत,जल, फुल और द्रव्य को अपनी दाहिने हाथ की अंजुली में लेकर पूजा संकल्प करें और पूजा की सिद्धि की कामना करें .
- अपने हाथ में मौली या कलावा पहन लें.
- सर्वप्रथम प्रथमपूज्य श्री गणेश व माता गौरी का पूजन करें. 
- अब कलश की पूजा करें.
- अब नवग्रह स्तोत्र पढ़ते हुये नवग्रहों की पूजा करिए.
- तत्पश्चात षोडश माताओं का गंध,पुष्प, अक्षत आदि से पूजन करें.
- सभी देवी देवताओ को तिलक अर्पित करके स्वयं को भी तिलक लगायें.
- प्रतिमा या मूर्ति के सम्मुख सात, ग्यारह या इक्कीस दीपक प्रज्ज्वलित करें.
- माँ को श्रींगार अर्पित करें.
अब माता महालक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए लक्ष्मिसुक्त का प्रसन्नचित्त मुद्रा में पाठ करें.
तत्पश्चात भोग लगायें तथा माता महालक्ष्मी की आरती करें.



पूजनोपरांत क्षमा याचना :-

पूजा सम्पूर्ण होने के पश्चात माता महालक्ष्मी से स्वयम से जाने अनजाने में हुयी किसी भी भूल के लिए क्षमा याचना अवश्य करें. क्षमा याचना के लिए नीचे दिए गये मंत्र का उच्चारण करें.
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क्षमा प्रार्थना मंत्र
पूजन समाप्ति के पश्चात् तुरंत प्रसाद ना बाँटें, अपितु जब तक माँ लक्ष्मी के सम्मुख दीपक प्रज्ज्वलित होती रहे, तब तक भोग प्रसाद पूजन स्थल में ही रहने दे. 

माँ महालक्ष्मी की कृपा आप के ऊपर अवश्य बरसेगी.
नोट:- दीपावली पूजन ( deepavali pujan ) में मुहूर्त का सबसे खास ध्यान रखें.